दिलीप साहब: भूल नहीं पाएंगे आपको…एक फैन की चिट्ठी

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कौन कमब्ख्त याद करने के लिए नाम लेता है, हम तो ज़िक्र करते हैं कि आपको भूल नहीं पाते.

दिलीप कुमार साहब, सुबह सवेरे ख़बर मिली, आप, अब इस दुनिया में नहीं हैं.

लेकिन, यकीन कीजिए, रहती दुनिया तक, आपका नाम रहेगा. उतना ही रौशन, जितना सूरज है.

आपने आखिरी फ़िल्म कोई दो दशक पहले की थी. ठीक कहें तो 23 साल पहले. कई अभिनेताओं को तो इतने बरस का करियर भी नसीब नहीं होता.

इतने लंबे गैप के बाद भी आप अपने करोड़ों करोड़ चाहने वालों दिल-ओ-दिमाग़ से पल भर को ओझल नहीं हुए.

आप अर्से से बीमार थे. जब भी आप, अस्पताल में दाखिल होते तो सायरा बानू जी की तरफ से ख़बर आती. वो आपकी सेहत के बारे में जानकारी देतीं और दुनिया भर में फैले, आपके चाहने वालों से गुजारिश करतीं कि आपकी सेहत के लिए दुआ की जाए.

ख़ुद को आपकी छोटी बहन कहने वाली, लता मंगेशकर जी ने आपको श्रद्धांजलि देते हुए बताया है कि आप अर्से से किसी को पहचान नहीं पाते थे. सेहत भी लगातार गिर रही थी.

फिर भी मेरी तरह अनगिनत लोगों की ख्वाहिश थी कि आप जीवन के सौ बसंत पूरे करें. इस साल 11 दिसंबर को आप जीवन के 99 बरस पूरे करते और शताब्दी बरस शुरू होता.

दिलीप साहब, अपनी अदाकारी, अपने अंदाज़ और अपनी नफ़ासत की वजह से आप कहीं ना कहीं, उन तमाम दिलों में मौजूद हैं, जिन्होंने रूबरू या पर्दे पर आपको देखा. आपकी तस्वीर देखी या आपका ज़िक्र सुना.

आपका असर कितना गहरा था, इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि राजनीति के बहुत चर्चित नेता लालू प्रसाद यादव और सिनेमा के सुपरस्टार शाहरूख ख़ान ने कुछ एक बार ज़िक्र किया कि उनकी सूरत में आपका अक्स देखा जाता है.

यानी बड़े लोग, जो अमूमन किसी और से तुलना पसंद नहीं करते, वो भी इस बात पर फख्र करते थे कि किसी न किसी तरह वो आपसे मिलते हैं.

आपके दोस्तों और चाहने वालों की लिस्ट में पंडित जवाहर लाल नेहरू, बाला साहेब ठाकरे, इमरान ख़ान, नरेंद्र मोदी और विराट कोहली तक का नाम है.

और फिर अमिताभ बच्चन…. जिन्हें सुपरस्टार, मेगा स्टार, स्टार ऑफ द मिलेनियम, महानायक और जाने क्या- क्या कहा गया, तमाम समीक्षकों की नज़र में वो स्क्रीन पर आपसे प्रभावित दिखते थे. उनकी एक्टिंग में आपकी अदाकारी की झलक देखी जाती थी.

आप दोनों ने एक फ़िल्म साथ की थी…. ‘शक्ति’

ये फ़िल्म उस वक़्त बनी जब अमिताभ बच्चन ‘वनमैन इंडस्ट्री’ कहे जाने लगे थे. उनका रुतबा बुलंद था. सलीम जावेद उन्हें ध्यान में रखकर कहानियां लिख रहे थे.

शक्ति के निर्देशक रमेश सिप्पी उनके साथ शोले और शान जैसी बड़ी फ़िल्में बना चुके थे.

लेकिन, जब फ़िल्म आई, तो अमिताभ बच्चन से प्रभावित समीक्षकों ने कहा कि रमेश सिप्पी आपके असर में आ गए. फ़िल्म में आपका हिस्सा सुपर स्टार बच्चन पर भारी पड़ गया.

तमाम दूसरे लोगों ने इसे यूं देखा कि अगर बच्चन तब सेर थे तो आप सवा सेर. यानी सबसे बड़े सुपरस्टार से भी बड़े सितारे.

आपका ये रुतबा बना रहा और आपके दूसरी दुनिया में जाने के बाद भी बना रहेगा.

खुद अमिताभ बच्चन ने आपको याद करते हुए लिखा है कि भारतीय सिनेमा का जब भी इतिहास लिखा जाएगा, उसमें कालखंड को दिलीप कुमार के पहले और दिलीप कुमार के बाद बांटकर देखा जाएगा.

दिलीप साहब आपने जो कुछ किया, वो सब मिसाल बन गया. देवदास का दर्द हो या मुगल-ए-आजम से बगावत. ‘प्यार किया तो डरना क्या…’ का एलान करती मधुबाला की ख्वाहिशों को अपनी आंखों में समेट लेना हो. क्रांति में अंग्रेजों को ललकारता आज़ादी का सिपाही हो या फिर मशाल, विधाता और सौदागर में ढलती उमर वाले किरदार, आपने सबको अमर कर दिया.

ये किस्सा थम गया है और ट्रेजडी किंग, बेशक सभी ग़मगीन हैं, लेकिन इसे हैप्पी एंडिंग ही कहना अच्छा होगा… आपकी ज़िंदगी सेलेब्रेट करने लायक है.

शुक्रिया और अलविदा दिलीप साहब

एक फ़ैन

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