• राजद्रोह क़ानून और आलोचना का हक़

    राजद्रोह क़ानून और आलोचना का हक़0

    निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय, बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय। अर्थात निंदक को पास रखना चाहिए क्योंकि वह मुफ्त में ही हमारी कमियां बता रहता है। ऐसा कबीर कह गए हैं। हालांकि कबीर की ये बात सरकारों को कभी रास नहीं आई। सरकारें निंदकों को सबक सिखाने के हमेशा तत्पर रहती हैं।

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