TheInterviewTimes.com | 14 जुलाई 2026 | नई दिल्ली
मध्य पूर्व में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मंगलवार को ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ईरान ने इज़राइल पर हमला किया, तो उसका जवाब पहले की तरह “जवाबी कार्रवाई” नहीं होगा, बल्कि उससे कहीं अधिक शक्तिशाली और निर्णायक हमला किया जाएगा।
नेतन्याहू ने कहा, “यह मत सोचिए कि हम केवल जवाब देंगे। यह पहले जैसा जवाब नहीं होगा। यह बिल्कुल अलग और कहीं ज्यादा ताकतवर कार्रवाई होगी। अब वह दौर खत्म हो गया है जब कोई हम पर हमला करे और हम केवल उसी स्तर पर प्रतिक्रिया दें।”
यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव अपने सबसे गंभीर दौर में पहुंच चुका है।
Prime Minister Netanyahu, today, at the Negev Conference in Dimona – in a message to Iran's leaders:
— Prime Minister of Israel (@IsraeliPM) July 14, 2026
"We are prepared for any scenario. I can tell you only one thing, and I will say this to the leaders of Iran: Do not count on it being quiet if you attack us. Do not count on a… pic.twitter.com/tbgRd7PNon
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अमेरिका-ईरान संघर्ष और गहराया
17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों के युद्धविराम (सीजफायर) और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर अंतरिम सहमति बनी थी। लेकिन यह समझौता ज्यादा दिन नहीं टिक सका।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 8 जुलाई को घोषणा की कि युद्धविराम समाप्त हो चुका है। इसके बाद अमेरिकी सेना ने कई चरणों में ईरान के सैन्य ठिकानों, मिसाइल लॉन्च साइटों, ड्रोन बेस, नौसैनिक क्षमताओं और निगरानी केंद्रों पर व्यापक हवाई हमले किए।
इसके जवाब में 13 जुलाई को ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने बहरीन, कुवैत, कतर, ओमान और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इसके बाद अमेरिका ने ईरान के दक्षिणी तटीय क्षेत्रों में 80 से अधिक अतिरिक्त सैन्य ठिकानों पर हमले किए।
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इज़राइल क्यों सतर्क है?
विशेषज्ञों का मानना है कि नेतन्याहू का बयान ईरान को यह संदेश देने के लिए है कि वह अमेरिका के साथ चल रहे संघर्ष के बीच इज़राइल के खिलाफ नया मोर्चा खोलने की कोशिश न करे।
जून की शुरुआत में भी दोनों देशों के बीच सीधे सैन्य हमले हुए थे। ईरान ने उत्तरी इज़राइल पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं, जबकि इज़राइल ने ईरान के मध्य और पश्चिमी हिस्सों में सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए थे। बाद में अमेरिकी हस्तक्षेप के बाद यह टकराव अस्थायी रूप से थम गया था।
हाल के दिनों में इज़राइल ने अमेरिका के साथ खुफिया जानकारी भी साझा की है, जिसमें ईरान पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की नई साजिश रचने का आरोप लगाया गया है।
आगे क्या?
नेतन्याहू का यह बयान संकेत देता है कि यदि ईरान और इज़राइल के बीच फिर से सीधा सैन्य संघर्ष शुरू होता है, तो उसका दायरा पहले से कहीं अधिक बड़ा और विनाशकारी हो सकता है। ऐसे में पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता बढ़ने और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति तथा तेल बाजार पर इसका असर पड़ने की आशंका भी गहरा गई है।
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