नई दिल्ली, 14 जुलाई 2026
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT जांच, 8 गिरफ्तारियों, करोड़ों की संपत्ति बरामद और सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी। जानिए 40 दिन में 70 बार चोरी से लेकर ट्रस्ट में बड़े बदलाव तक की पूरी कहानी
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले ने अब न्यायिक और प्रशासनिक स्तर पर बड़ा मोड़ ले लिया है। उत्तर प्रदेश सरकार के विशेष जांच दल (SIT) की जांच, कई गिरफ्तारियों और सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद मामले में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। अब तक की प्रमुख घटनाओं पर एक नजर-
27 अप्रैल से 5 जून: 40 दिनों में 70 बार चोरी का दावा
SIT की जांच में सामने आया कि 27 अप्रैल से 5 जून के बीच राम मंदिर के दानपात्रों से निकाली गई नकदी की गिनती के दौरान 70 बार चोरी की गई। जांच रिपोर्ट के अनुसार आरोपी नोटों के बंडल अपने कपड़ों में छिपाकर बाहर ले जाते थे।
पूछताछ में यह भी सामने आया कि चोरी मुख्य रूप से दोपहर 2 बजे से रात 9 बजे तक की दूसरी शिफ्ट में की जाती थी। इस शिफ्ट में निगरानी अपेक्षाकृत कम रहती थी।

मुख्य आरोपी पर 50 से अधिक बार चोरी का आरोप
जांच एजेंसियों के अनुसार गिरफ्तार कर्मचारियों में अविनाश शुक्ला पर सबसे अधिक चोरी करने का आरोप है। SIT का दावा है कि अविनाश शुक्ला ने अकेले 50 से अधिक बार चोरी की और कुछ दिनों में तो दो-दो बार नकदी निकाली।
8 आरोपी गिरफ्तार, करोड़ों की संपत्ति बरामद
अब तक इस मामले में 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। अदालत ने 13 जुलाई को सभी आरोपियों की न्यायिक हिरासत 14 दिनों के लिए बढ़ा दी।
जांच एजेंसियों का दावा है कि आरोपियों से चोरी की रकम से खरीदी गई जमीन के दस्तावेज, आभूषण, नकदी समेत 4 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्ति बरामद की गई है। SIT ने कई शिकायतकर्ताओं, बैंक अधिकारियों और अन्य गवाहों से भी पूछताछ की है।

6 जुलाई ट्रस्ट में बड़े बदलाव
विवाद बढ़ने के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया, जिसे ट्रस्ट ने 6 जुलाई को स्वीकार कर लिया। कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव बनाया गया है।
ट्रस्ट से प्रशासनिक और वित्तीय पारदर्शिता के बढ़ाने के लिए CEO पद पर नियुक्ति के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है।
चढ़ावे की गिनती की व्यवस्था भी बदल दी गई है। अब यह केवल एक शिफ्ट में कराई जा रही है।
13 जुलाई: सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
13 जुलाई को भारत के सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने SIT को 20 जुलाई तक जांच की प्रगति रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत करने को कहा है।
कोर्ट में दायर जनहित याचिकाओं में मामले की सीबीआई जांच, फोरेंसिक ऑडिट और CAG से खातों की जांच कराने की मांग भी की गई है।
आगे क्या होगा?
माना जा रहा है कि SIT दो-तीन दिन में अपनी अंतिम रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंप सकती है। रिपोर्ट में कथित प्रशासनिक लापरवाही और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
इस मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में होगी जहां SIT की स्टेटस रिपोर्ट पर आगे की कार्रवाई तय हो सकती है।
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