TheInterviewTimes.com | 11 August 2026, 10:30 PM IST | New Delhi
Article Summary
UPI पर फिलहाल ग्राहक से कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा। लेकिन संसद से Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 पास होने के बाद सरकार के लिए चुनिंदा डिजिटल पेमेंट पर MDR लागू करने का कानूनी रास्ता खुल गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि आम उपभोक्ता और छोटे व्यापारी सुरक्षित रहेंगे।
Key Highlights
- Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 संसद से पास हो गया है।
- बिल में Payment and Settlement Systems Act, 2007 में बदलाव किया गया है।
- इससे भविष्य में सरकार को कुछ डिजिटल पेमेंट पर शुल्क/MDR की व्यवस्था की अनुमति देने का रास्ता मिला है।
- अभी UPI पर कोई नया चार्ज लागू नहीं हुआ है।
- वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि आम उपभोक्ताओं के लिए UPI मुफ्त रहेगा।
- छोटे दुकानदार, जैसे सब्जी विक्रेता, चाय वाले और hawkers, प्रस्तावित MDR के दायरे से बाहर रहेंगे।
- MDR की अंतिम दर और लागू होने की सीमा अभी तय नहीं की गई है।
- Person-to-Person यानी P2P UPI ट्रांसफर पर शुल्क लगाने की बात नहीं है।
UPI पर नए बिल से क्या बदला?
UPI को लेकर पिछले कुछ दिनों से सबसे बड़ा सवाल यही था कि क्या भारत में डिजिटल पेमेंट के इस सबसे लोकप्रिय माध्यम पर अब चार्ज लगने वाला है। 11 अगस्त 2026 को तस्वीर पहले से ज्यादा साफ हो गई है। संसद ने Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 को पारित कर दिया है।
यह सिर्फ UPI से जुड़ा बिल नहीं है। इसमें टैक्स और निवेश से जुड़े कई प्रावधान हैं। लेकिन डिजिटल पेमेंट के नजरिए से इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा Payment and Settlement Systems Act, 2007 में बदला गया है।
इस बदलाव से सरकार के लिए भविष्य में कुछ डिजिटल पेमेंट पर शुल्क की अनुमति देने का रास्ता खुल गया है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आज से ही UPI पर चार्ज लग गया है। यही सबसे महत्वपूर्ण अंतर है।
वित्त मंत्री ने क्या कहा?
संसद में चर्चा के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने UPI को लेकर स्थिति स्पष्ट की। उनका कहना है कि आम उपभोक्ताओं के लिए UPI मुफ्त रहेगा। साथ ही छोटे व्यापारियों को भी प्रस्तावित MDR के दायरे से बाहर रखने की बात कही गई है। इसमें सब्जी विक्रेता, चाय वाले और छोटे हॉकर्स शामिल हैं।
इसका सीधा मतलब है कि अगर आप किसी छोटे दुकानदार को ₹50, ₹100 या ₹500 UPI से भुगतान कर रहे हैं, तो फिलहाल आपके लिए कोई नया UPI शुल्क लागू नहीं हुआ है। इसी तरह किसी दोस्त या रिश्तेदार को UPI से पैसा भेजने पर भी नया शुल्क लागू नहीं हुआ है।

फिर विवाद किस बात का है?
विवाद इसलिए है क्योंकि पहले सामान्य बैंक-अकाउंट आधारित UPI और RuPay Debit Card भुगतान के लिए Zero-MDR व्यवस्था को कानूनी सुरक्षा मिली हुई थी। 2020 से सरकार ने UPI और RuPay debit payments को बढ़ावा देने के लिए MDR को शून्य रखा।
इसका मकसद था कि डिजिटल भुगतान करते समय ग्राहक और छोटे व्यापारी पर अतिरिक्त लागत न आए।
सरकार ने इसके बदले भुगतान प्रणाली (Payment Ecosystem) में शामिल हितधारकों (Stakeholders) को Incentive Scheme के जरिए सहायता दी। लेकिन अब UPI का आकार इतना बड़ा हो चुका है कि इस मॉडल की आर्थिक स्थिरता (Sustainability) पर सवाल उठने लगे हैं।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में UPI पर 24,162 करोड़ transactions हुए और इनका कुल मूल्य करीब ₹314 लाख करोड़ रहा। जून 2026 तक करीब 55.49 करोड़ यूपीआई यूजर्स जुड़ चुके थे। इतने बड़े नेटवर्क को चलाने के लिए Banking Infrastructure, Servers, Cybersecurity, Fraud Monitoring और Payment Processing पर लगातार खर्च होता है। यही वजह है कि अब MDR को लेकर नई बहस शुरू हुई है।
MDR क्या है और किससे लिया जाता है?
MDR यानी Merchant Discount Rate डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारी (Merchant) से लिया जाने वाला प्रोसेसिंग चार्ज है।
मान लीजिए किसी बड़े व्यापारी ने UPI से ₹10,000 का पेमेंट स्वीकार किया। अगर भविष्य में उस कैटेगरी पर MDR लागू होता है, तो व्यापारी के सेटलमेंट से एक छोटा हिस्सा प्रोसेसिंग फी के रूप में काटा जा सकता है। लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण बात समझनी जरूरी है। MDR और UPI user fee एक ही चीज नहीं हैं।
सरकार की मौजूदा घोषणा के मुताबिक आम उपभोक्ता से सीधे UPI transaction fee लेने की बात नहीं है। यानी यह समझ लेना कि अब हर बार QR Code scan करने पर ग्राहक से पैसा लिया जाएगा, गलत होगा।
क्या हर UPI payment पर MDR लगेगा?
जवाब है नहीं। सरकार ने अभी कोई ऐसी व्यवस्था घोषित नहीं की है जिसमें हर UPI payment पर MDR लगाया जाए। वित्त मंत्री ने कहा है कि यदि भविष्य में MDR लागू किया जाता है, तो यह Selected Merchant Transactions तक सीमित रहेगा और दर कम रखी जाएगी।
छोटे व्यापारियों को इससे बचाने की बात भी स्पष्ट की गई है। हालांकि अभी दो चीजें पूरी तरह तय नहीं हैं:
पहली, MDR की exact rate क्या होगी?
दूसरी, किस transaction value या merchant category से यह लागू होगा?
इन्हीं दोनों चीजों पर आने वाले समय में सबसे ज्यादा नजर रहेगी।
क्या ₹2,000 से ऊपर UPI पर चार्ज लगेगा?
पिछले कुछ दिनों में ₹2,000 की threshold को लेकर काफी चर्चा हुई है। कुछ रिपोर्टों में कहा गया कि भविष्य में ₹2,000 से ऊपर के चुनिंदा merchant transactions पर MDR लगाया जा सकता है। लेकिन अभी इसे सरकार द्वारा घोषित अंतिम सीमा नहीं माना जा सकता।
यानी यह कहना कि “₹2,000 से ऊपर हर UPI payment पर चार्ज लगेगा”, फिलहाल सही नहीं होगा। सरकार ने अभी ऐसी अंतिम अधिसूचना (final notification) जारी नहीं की है।
इसी तरह 0.25%, 0.30%, 0.40% या कोई अन्य प्रतिशत भी अभी सरकार ने तय नहीं की है। इसलिए वायरल सोशल मीडिया पोस्ट में बताए जा रहे किसी निश्चित प्रतिशत को सरकारी दर मानना गलत होगा।

संसद से पास बिल का असली मतलब क्या है?
यहीं इस पूरे मामले की सबसे महत्वपूर्ण बात छिपी है। आज की स्थिति में UPI पर कोई नया charge शुरू नहीं हुआ है। लेकिन संसद से पारित कानून ने सरकार के लिए भविष्य में शुल्क व्यवस्था लागू करने का कानूनी रास्ता खोल दिया है।
इसे ऐसे समझिए।
पहले Zero-MDR व्यवस्था के कारण सरकार के पास इस तरह का शुल्क लागू करने की कानूनी गुंजाइश सीमित थी। अब कानून में बदलाव के बाद सरकार Notification और आगे की Regulatory Framework के जरिए कुछ Digital Payment Transactions के लिए शुल्क की व्यवस्था कर सकती है।
इसलिए असली खबर यह नहीं है कि…“UPI आज से paid हो गया।”
असली खबर यह है कि…
“सरकार ने भविष्य में चुनिंदा UPI transactions पर MDR लागू करने का कानूनी रास्ता खोल दिया है।”
दोनों बातों में बड़ा अंतर है।
सरकार को MDR की जरूरत क्यों महसूस हो रही है?
यह सवाल भी महत्वपूर्ण है। UPI का इस्तेमाल जितना बढ़ रहा है, payment ecosystem पर infrastructure cost भी बढ़ रही है। बैंक, payment service providers और technology platforms को transaction processing, cybersecurity, fraud prevention और customer support पर खर्च करना पड़ता है।
दूसरी तरफ Zero-MDR व्यवस्था में इन सेवाओं से सीधे transaction revenue हासिल करना आसान नहीं रहा। सरकार ने अब तक incentive schemes के जरिए ecosystem को support किया है।
लेकिन जैसे-जैसे UPI का scale बढ़ा है, यह सवाल उठ रहा है कि क्या पूरा ecosystem लंबे समय तक subsidy या सरकारी support पर चल सकता है।
इसीलिए बड़े commercial transactions पर सीमित MDR का विचार सामने आया है। कुछ विशेषज्ञों का तर्क है कि high-value merchant transactions से revenue पैदा करके छोटे transactions को free रखा जा सकता है।
ग्राहक पर क्या असर पड़ेगा?
फिलहाल सीधा असर नहीं है। अगर आप किसी दोस्त को ₹1,000 भेजते हैं, तो उस P2P transaction पर नया UPI charge लागू नहीं हुआ है।
अगर आप किसी छोटे दुकानदार को ₹200 का भुगतान करते हैं, तो सरकार ने छोटे merchants को proposed MDR से बचाने की बात कही है।
लेकिन भविष्य में indirect impact की संभावना पर बहस जरूर है। मान लीजिए किसी बड़े merchant पर MDR लागू होता है। उसकी payment cost बढ़ सकती है। वह अपनी pricing strategy बदल सकता है। और कुछ परिस्थितियों में यह cost अंततः product या service की कीमत में दिखाई दे सकती है। लेकिन यह अभी संभावित economic impact है, कोई घोषित consumer charge नहीं।
UPI को लेकर आगे क्या देखना होगा?
अब सबसे महत्वपूर्ण नजर सरकार की अगली notification पर होगी। क्योंकि कानून पास होने के बाद भी चार चीजें तय होना बाकी हैं:
1. MDR की दर – कितने प्रतिशत शुल्क होगा?
2. Transaction threshold – कितने रुपये से ऊपर के payment पर शुल्क लागू होगा?
3. Merchant category – क्या हर बड़े merchant पर लागू होगा या सिर्फ कुछ categories पर?
4. Consumer protection – क्या merchant ग्राहक से अलग से UPI charge वसूल सकेगा या नहीं?
इन सवालों के जवाब आने वाली regulatory notification और framework से साफ होंगे।
UPI की कहानी में यह एक बड़ा Policy Shift क्यों है?
UPI भारत की Digital Public Infrastructure की सबसे बड़ी सफलता की कहानियों में से एक है। इसने cash और card-based payments के बीच एक नया विकल्प दिया। छोटे से छोटे दुकानदार के लिए QR Code लगाना आसान हुआ। ग्राहक को cash रखने की जरूरत कम हुई।
और भारत ने दुनिया के सामने एक ऐसा real-time digital payment model रखा जिसे कई देश अपनाने की कोशिश कर रहे हैं।
इसीलिए UPI पर pricing model में कोई भी बदलाव सिर्फ payment industry का मामला नहीं है। इसका असर consumers, small businesses, banks, fintech companies और पूरी digital economy पर पड़ सकता है।
सरकार के सामने चुनौती यही है कि payment ecosystem financially sustainable भी बने और UPI की सबसे बड़ी ताकत यानी low-cost और universal access भी बनी रहे।
Key Takeaways
पहली बात: आज से UPI पर कोई नया consumer charge शुरू नहीं हुआ है।
दूसरी बात: संसद ने Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 पारित कर दिया है।
तीसरी बात: इस कानून में Payment and Settlement Systems Act में बदलाव से भविष्य में select digital payments पर MDR की व्यवस्था का रास्ता खुला है।
चौथी बात: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि आम consumers के लिए UPI free रहेगा।
पांचवीं बात: छोटे merchants, जैसे सब्जी विक्रेता, चाय वाले और hawkers को proposed MDR से बाहर रखने की बात कही गई है।
छठी बात: MDR की final rate और threshold अभी तय नहीं हैं।
सातवीं बात: ₹2,000 की सीमा और 0.25%-0.40% जैसी दरों को अभी final government notification नहीं माना जाना चाहिए।
इसलिए फिलहाल सबसे सटीक बात यही है:
UPI खत्म नहीं हुआ है, UPI paid नहीं हुआ है। लेकिन Zero-MDR व्यवस्था में एक बड़ा कानूनी बदलाव जरूर हो गया है।
और आने वाले दिनों में असली कहानी इस बात पर होगी कि सरकार इस नए अधिकार का इस्तेमाल किस transaction पर, किस merchant पर और कितने MDR के साथ करती है।
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