Netanyahu ने Trump को दिया बड़ा झटका, Gaza Plan क्यों ठुकराया?

TheInterviewTimes.com | 9 अगस्त 2026 | नई दिल्ली

इजरायली प्रधानमंत्री Netanyahuने कहा कि Hamas के पूरी तरह निहत्था होने तक Gaza से Israeli सेना की वापसी नहीं होगी। इजरायली रुख में इस बदलाव से Washington और Jerusalem के बीच तनाव बढ़ा है और Gaza ceasefire framework के अगले चरण पर संकट गहरा गया है।

इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के Gaza के लिए प्रस्तावित 15-सूत्रीय roadmap को खारिज कर दिया है। Netanyahu ने साफ कहा है कि जब तक Hamas पूरी तरह और वास्तविक रूप से निहत्था नहीं हो जाता, तब तक Israel Defense Forces (IDF) Gaza से पीछे नहीं हटेगी।

रविवार को कैबिनेट मीटिंग में Netanyahu ने कहा, “Israel 15-सूत्रीय दस्तावेज को स्वीकार नहीं करता।” उन्होंने कहा कि इजरायली सेना अपने सैनिकों और नागरिकों के लिए खतरा पैदा करने वाली किसी भी स्थिति के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगी और Hamas के हथियार डालने तक सैन्य वापसी नहीं होगी।

Netanyahu के मुताबिक, Israel के लिए disarmament का मतलब केवल भारी हथियारों को हटाना नहीं है। इसमें हल्के हथियारों के साथ-साथ Hamas की सभी सैन्य क्षमताओं को समाप्त करना शामिल है। उन्होंने किसी भी तरह के अधूरे या केवल दिखावटी disarmament को स्वीकार करने से इनकार किया है।

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Hamas ने अमेरिका से Netanyahu पर दबाव बनाने को कहा

इजरायल के इस रुख के बीच Hamas ने Trump administration से हस्तक्षेप करने की मांग की है।

Hamas के वरिष्ठ नेता Bassem Naim ने कहा कि संगठन roadmap के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए हुए है। उनका कहना है कि अमेरिका और अन्य मध्यस्थों को Netanyahu सरकार पर agreement लागू करने के लिए दबाव डालना चाहिए।

Hamas का आरोप है कि Netanyahu घरेलू राजनीतिक दबाव के कारण agreement के implementation में बाधा डाल रहे हैं। यहीं से पूरे ceasefire framework का सबसे बड़ा विवाद सामने आता है।

Israel का कहना है कि पहले Hamas का पूर्ण Disarmament होना चाहिए और उसके बाद Israeli Troops Gaza से हटेंगे।

इसके विपरीत, Hamas का कहना है कि Israeli withdrawal, military operations का अंत और humanitarian access में सुधार disarmament process को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी हैं।

यानी विवाद केवल इस बात पर नहीं है कि Hamas को निहत्था किया जाए या नहीं। असली सवाल यह है कि पहले क्या होगा और किस चरण में क्या लागू किया जाएगा।

Trump के 15-सूत्रीय Gaza Plan में क्या है?

Trump के Board of Peace ने 30 जुलाई को Gaza के लिए 15-सूत्रीय roadmap की घोषणा की थी। इसका मुख्य उद्देश्य Hamas और अन्य armed groups को धीरे-धीरे disarm करना और Gaza में एक नई security तथा governance व्यवस्था तैयार करना है।

योजना के तहत Hamas के हथियारों, military production facilities, weapons depots और tunnels की पहचान कर उनकी inventory तैयार करने की बात कही गई है। इसके बाद इन सैन्य संसाधनों को decommission करके सुरक्षित storage में रखने का प्रस्ताव है।

Framework के मुताबिक, जैसे-जैसे disarmament आगे बढ़ेगा, Israeli forces भी चरणबद्ध तरीके से अपनी तैनाती कम करेंगी।

योजना में Gaza के civilian administration की जिम्मेदारी एक Palestinian technocratic body, National Committee for the Administration of Gaza, को देने का प्रस्ताव भी है।

इसके अलावा ceasefire की निगरानी, humanitarian operations में मदद और security arrangements को support करने के लिए एक अस्थायी International Stabilization Force की भूमिका प्रस्तावित की गई है।

एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह भी बताया गया है कि disarmament के दौरान इकट्ठा किए गए हथियार Israel या किसी दूसरे non-Palestinian पक्ष को नहीं सौंपे जाएंगे। इन्हें Gaza के प्रशासन की जिम्मेदारी संभालने वाली Palestinian body को transfer किया जाएगा।

लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि Netanyahu इस document को ऐसा agreement नहीं मानते जिसे Israel ने स्वीकार कर लिया हो।

Netanyahu पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि Washington ने Israel को इस प्रस्ताव का एक draft भेजा था, लेकिन Jerusalem ने उसे मंजूरी नहीं दी थी और अपनी टिप्पणियां तथा आपत्तियां अमेरिका को वापस भेज दी थीं।

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Netanyahu और Trump के बीच बढ़ता मतभेद

Netanyahu का ताजा बयान Washington और Jerusalem के बीच बढ़ते मतभेद का संकेत है। Trump administration ने Board of Peace की घोषणा को Gaza Diplomacy में एक बड़े Breakthrough के तौर पर पेश किया था। लेकिन Israel की ओर से लगातार reservations और अब खुले तौर पर rejection ने इस initiative के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब Gaza ceasefire framework के अगले चरण को लागू करने की कोशिशें चल रही हैं।

रिपोर्टों के मुताबिक, Netanyahu और Trump के Gaza envoy Nikolay Mladenov के बीच बातचीत के बाद Israel ने Gaza में अपने हमलों में कुछ कमी भी की थी। लेकिन अब Netanyahu का यह स्पष्ट रुख अगले चरण की negotiations को और कठिन बना सकता है।

Netanyahu ने यह भी दोहराया है कि Israel अपने सैनिकों और नागरिकों की सुरक्षा के लिए स्वतंत्र रूप से कार्रवाई करने का अधिकार बनाए रखेगा।

इसके साथ ही वह Gaza या West Bank में Palestinian state की स्थापना के भी विरोधी हैं। यह मुद्दा Trump administration की व्यापक Middle East strategy के लिए एक और बड़ी चुनौती बन सकता है।

Netanyahu पर घरेलू राजनीतिक दबाव

Netanyahu का Gaza को लेकर सख्त रुख केवल security concerns तक सीमित नहीं है। इसके पीछे उनकी domestic politics भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

Netanyahu की सरकार दक्षिणपंथी coalition partners के समर्थन पर निर्भर है। ये सहयोगी Gaza से किसी भी तरह की withdrawal का विरोध करते रहे हैं और Hamas के साथ किसी negotiated transition के बजाय उसके पूरी तरह समाप्त किए जाने की मांग करते हैं।

ऐसे में Netanyahu के लिए Gaza से सैन्य वापसी स्वीकार करना राजनीतिक रूप से बेहद जोखिम भरा हो सकता है।

दूसरी ओर, Hamas को डर है कि Israel के लिए “complete disarmament” की शर्त withdrawal को अनिश्चित समय तक टालने का माध्यम बन सकती है।

Israel की चिंता इसके उलट है। उसका तर्क है कि अगर Hamas केवल कुछ हथियार छोड़ता है और अपनी सैन्य क्षमता का एक हिस्सा बचाए रखता है, तो वह भविष्य में फिर से संगठित होकर Israel पर हमला कर सकता है।

असली विवाद: Disarmament पहले या Withdrawal?

पूरे विवाद को एक सवाल में समेटा जाए तो वह है:

क्या पहले Hamas को पूरी तरह निहत्था किया जाएगा या Israeli withdrawal और disarmament एक साथ, चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेंगे?

Israel पहले विकल्प पर जोर दे रहा है।

Hamas और Trump-backed framework दूसरे विकल्प की ओर इशारा करते हैं, जिसमें Israeli redeployment और Hamas disarmament को एक coordinated process के रूप में आगे बढ़ाने की बात है।

यही sequencing अब Gaza ceasefire framework के भविष्य की सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।

अगर Washington Israel और Hamas के बीच इस मूलभूत मतभेद को दूर नहीं कर पाता, तो Trump का Gaza initiative भी Middle East में पहले के कई असफल diplomatic प्रयासों की तरह अटक सकता है।

फिलहाल स्थिति यह है कि Hamas roadmap को आगे बढ़ाने की मांग कर रहा है, जबकि Netanyahu कह रहे हैं कि पूर्ण disarmament से पहले Israel की सेना Gaza से नहीं हटेगी।

यानी Gaza ceasefire के अगले चरण का भविष्य अब केवल battlefield पर नहीं, बल्कि Washington, Jerusalem और Hamas के बीच होने वाली diplomacy पर भी निर्भर करेगा।