अमेरिका ने दक्षिणी ईरान में एयरपोर्ट और पुलों पर किए हमले, होरमुज़ के पास युद्ध तेज

TheInterviewTimes.com | 17 जुलाई 2026 | नई दिल्ली

अमेरिका ने दक्षिणी ईरान के एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और अहम पुलों पर हवाई हमले किए। होरमुज़ जलडमरूमध्य के आसपास तनाव बढ़ा, ईरान ने खाड़ी देशों में जवाबी कार्रवाई तेज की।

Article Summary

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को और तेज करते हुए दक्षिणी ईरान में एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और रणनीतिक पुलों पर हवाई हमले किए हैं। यह लगातार छठी रात है जब अमेरिकी सेना ने हमले किए हैं। इन हमलों का मुख्य उद्देश्य होरमुज़ जलडमरूमध्य तक ईरान की सैन्य आपूर्ति लाइनों को बाधित करना बताया जा रहा है।

Key Highlights

  • अमेरिका ने दक्षिणी ईरान के एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और दो प्रमुख पुलों को निशाना बनाया।
  • यह लगातार छठी रात है जब अमेरिकी हवाई हमले हुए।
  • ईरान के अनुसार कई नागरिकों की मौत हुई है।
  • खाड़ी क्षेत्र में ईरान की जवाबी कार्रवाई से क्षेत्रीय तनाव बढ़ा।
  • युद्धविराम टूटने के बाद दोनों देशों के बीच संघर्ष लगातार तेज हो रहा है।

अमेरिका ने ईरान की सप्लाई लाइन पर किया वार, खाड़ी क्षेत्र में मचा हड़कंप

अमेरिका ने गुरुवार देर रात ईरान के खिलाफ अपने हवाई अभियान का विस्तार करते हुए दक्षिणी ईरान में कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया। हमलों में बंदर अब्बास क्षेत्र का एक एयरपोर्ट, रेलवे जंक्शन और होरमुज़ जलडमरूमध्य के पास स्थित दो प्रमुख पुल शामिल हैं। इन हमलों को ईरान की सैन्य आपूर्ति और लॉजिस्टिक्स क्षमता को कमजोर करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

होरमुज़ के पास रणनीतिक ढांचे पर हमला

रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी हमलों में काहुरेस्तान और गरिवेह पुलों को निशाना बनाया गया। ये दोनों पुल बंदर अब्बास को शिराज से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण सड़क मार्ग हैं। इसके अलावा बंदर अब्बास रेलवे जंक्शन और एक एयरपोर्ट पर भी हमले किए गए।

ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक पुलों पर हुए हमलों में कई लोगों की मौत हुई है। बाद में सरकारी और अर्ध-सरकारी एजेंसियों ने मृतकों की संख्या बढ़ने की पुष्टि की। ईरान सरकार का कहना है कि पिछले सप्ताह से शुरू हुए अमेरिकी हमलों में अब तक कम से कम 30 लोगों की जान जा चुकी है।

अमेरिका का उद्देश्य क्या है?

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि उसका अभियान ईरान की मिसाइल, ड्रोन, नौसैनिक क्षमताओं और तटीय रक्षा प्रणाली को कमजोर करने पर केंद्रित है। अमेरिकी रणनीति का मकसद ईरान की उस क्षमता को कम करना है जिससे वह होरमुज़ जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों को खतरा पहुंचा सके।

होरमुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है।

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खाड़ी देशों में बढ़ा तनाव

अमेरिकी हमलों के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया। कुवैत में मिसाइल और ड्रोन खतरे के बीच एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय किए गए हैं। बहरीन में एयर रेड सायरन बजाए गए। कतर की राजधानी दोहा में विस्फोटों की आवाजें सुनाई दीं, जिसके बाद सरकार ने नागरिकों के मोबाइल फोन पर सुरक्षा अलर्ट जारी किया।

ईरान पहले ही बहरीन, कुवैत, जॉर्डन और कतर में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा कर चुका है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) का कहना है कि उसने क्षेत्र में कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं।

युद्धविराम पूरी तरह टूट चुका

यह संघर्ष उस अंतरिम युद्धविराम के समाप्त होने के बाद और तेज हो गया है, जिसने कुछ समय के लिए दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई रोक दी थी।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि यदि ईरान समझौते के लिए तैयार नहीं हुआ तो अमेरिका बिजली संयंत्रों और पुलों जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भी निशाना बनाएगा। ताजा हमलों को उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

वहीं ईरान ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव को भेजे पत्र में अमेरिका पर नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले करने और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के गंभीर उल्लंघन का आरोप लगाया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों पक्ष सैन्य कार्रवाई जारी रखते हैं तो इसका असर केवल ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा। होरमुज़ जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ने से वैश्विक तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।