नाम गुम जाएगा…. मेरी आवाज ही पहचान है, गर याद रहे…

नाम गुम जाएगा…. मेरी आवाज ही पहचान है, गर याद रहे…

लता मंगेशकर के बारे में दुनिया जानती है कि वो स्वर कोकिला थीं, भारत रत्न थीं… लेकिन उनके बचपन, गाने की शुरुवात और स्ट्रगल की कहानी बहुत ज्यादा लोग शायद नहीं जानते होंगे। मंजिल इंसान की कुछ भी हो.. मगर लता मंगेशकर को लोग जितना जानेंगे उनका खुद का जीवन उतना ही निखरेगा, अगर कोई साफ नियत और ईमानदार कोशिशों से अपने मकसद में जुटता है तो…

भारत रत्न लता मंगेशकर अपने आप में एक इंस्टीट्यूशन थीं। लेकिन उनकी शुरुवाती जिंदगी दुखद रही.. उनके पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर ने उन्हें 5 साल की उम्र से रियाज करवाना शुरू किया। 13 वर्ष की उम्र में जब लता जी के सुर एवं ताल में परिपक्वता आई और वो गायन के क्षेत्र में करियर की दहलीज पर खड़ी थीं… तभी उनकी जिंदगी में ऐसा भूचाल आया की जिंदगी बेरंग और कांटों से भरी हो गई। उनके पिता जो मराठी जगत के बड़े थिएटर आर्टिस्ट थे… दुनिया छोड़ गए।

13 वर्ष की उम्र में नन्ही लता के कंधों पर अपनी बहन आशा, ऊषा, मीना और भाई हृदयनाथ मंगेशकर की जिम्मेदारी आगयी। लेकिन कहते हैं ना कि कुंदन तभी बनता है जब वो भट्टी में तपता है। जिम्मेदारियों के बोझ और कुछ कर गुजरने की तमन्ना का नाम है लता मंगेशकर।

लता मंगेशकर भले ही इस दुनिया से रुखसत हो गई हैं… लेकिन वो और उनके खूबसूरत गाने हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेंगे, क्योंकि लता मंगेशकर ने अपनी आवाज के जादू से लोगों के दिलों में एक ऐसी खास जगह बनाई है जो कभी मिट नहीं सकती। लता दी ने अपना पहला हिंदी गाना साल 1946 में गाया था। उन्होंने विभिन्न भारतीय भाषाओं में 30,000 से अधिक गानों को अपनी आवाज दी है।

लगभग आठ दशक के करियर में उन्होंने ‘जरा आंख में भरलो पानी’, ‘आज फिर जीने की तमन्ना है’, ‘अजीब दास्तान है ये’, ‘प्यार किया तो डरना क्या’, ‘नीला आसमां सो गया’ और ‘तेरे लिए’ जैसे कई यादगार ट्रैक्स को अपनी आवाज दी है। मोहम्मद रफ़ी, किशोर कुमार समेत कई सिंगर्स के साथ उन्होंने अनेकों सदाबाहर नगमे गाए।

प्रसिद्ध संगीतकारों में से एक खय्याम साहब ने फिल्म ‘रजिया सुल्तान’ का गाना ‘ए-दिल-ए-नादान’ के लिए लता दी को चुना और अपनी भावपूर्ण आवाज देकर गीत को 1980 के दशक के सर्वश्रेष्ठ गीतों में से एक बना दिया। उनका गया फिल्म अमर प्रेम का गाना ‘रैना बीती जाए’ लोगों के जुबान पर चढ़ गया। आज फिर जीने की तमन्ना’ वो गाना है जिसको आज भी लोग सुनना पसंद करते हैं।
दिल वाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ का सुपरहिट गाना ‘तुझे देखा तो ये जाना’… ये वो गाना था जिसने शाहरुख और काजोल की जोड़ी को सुपरहिट बना दिया। इस गाने को लोग आज भी ‘लव एंथम’ मानते हैं।

’मोहब्बतें’ फिल्म का सुपरहिट गाना ‘हमको हमी से चुरा लो’ … ऐसा गाना था जिसने शाहरुख और ऐश्वर्या राय की जोड़ी को रूहानी बना दिया था।


कभी खुशी कभी गम’ के टाइटल ट्रैक को स्वर कोकिला ने अपनी आवाज दी…. इस चर्चित धुन को सुनने के बाद संगीत प्रेमी आज भी लता दी के आवाजा के जादू को भूल नहीं पाते हैं। इसी तरह फिल्म दिल तो पागल है के गाने युवा दिलों की धड़कनें साबित हुईं।

‘ऐ मेरे वतन के लोगों’… वो गीत जो देशप्रेम को दर्शता है, सैनिकों को बलिदान को याद कराता है। इस मार्मिक गीत को सुनकर आज भी लोगों की आंखे नम हो जाती हैं। 1963 में गणतंत्र दिवस के मौके पर नई दिल्ली के नेशनल स्टेडियम में राष्ट्रपति एस राधाकृष्णन और प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की उपस्थिति में लता के प्रदर्शन ने भीड़ की आंखों को नम कर दिया था। कहा जाता है कि यह गाना सुन के प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू फूट फूट के रोए थे।

लता दी की आवाज का जादू न सिर्फ हिंदुस्तान बल्कि दुनिया भर में छाया था। लता दीदी के निधन से दुनिया भर में शोक की लहर फैली… हर किसी की संवेदना और प्रार्थनाएं रहीं। कभी लता मंगेशकर ने पीटीआई के साथ बातचीत में कहा था कि वह अब भी इस बात को याद करती हैं कि किस तरह दिग्गज गीतकार गुलजार के शब्द ”मेरी आवाज ही पहचान है”, संगीत की दुनिया में उनकी यात्रा को दर्शाते हैं क्योंकि उनके प्रशंसक उनकी आवाज से ही उनकी ”पहचान” को जोड़ते हैं…. अलविदा लता दीदी।

लेखक – शाहिद सईद
(लेखक मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक एवं मीडिया प्रभारी हैं)

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