• पुरुषार्थ क्या है? जानना क्यों जरूरी?

    पुरुषार्थ क्या है? जानना क्यों जरूरी?0

    पुरुष और अर्थ से मिल कर बना पुरुषार्थ शब्द अत्यंत गूढ़ और गहन ज्ञान वाला है। अयिए मेरे साथ चिंतन के धरातल पर चलें । वैसे तो सांख्य नाम का एक भारतीय दर्शन है जिसमें पुरुष शब्द का प्रयोग ब्रह्म के रूप में मिलता है। वहां पुरुष का अर्थ प्रथक है ,उस पर चर्चा फिर

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  • मृत्यु के बाद के कर्मकांड

    मृत्यु के बाद के कर्मकांड0

    जीवन का अंतिम संस्कार है मृत्यु । जतास्य हि ध्रुवो मृत्यु: जन्म मृत्यु ध्रुवस्च। जन्म लेने वाले की मृत्यु सुनिश्चित है चाहे राजा हो या रंक।            मृतक के शरीर की अंतिम क्रिया विभिन्न संप्रदायों, मजहबों में अलग अलग ढंग से की जाती है जिनका मुख्य संबंध सामाजिक रीति रिवाजों से अधिक है। कोई जलाए

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  • हिन्दू मन का भटकाव, कारण और निवारण

    हिन्दू मन का भटकाव, कारण और निवारण0

    आए दिन प्रश्न आते हैं और आप स्वयं इन प्रश्नों से रोज रोज जूझते हैं कि मन भटकता क्यों है? वैसे तो मन के भटकाव का व्यापक विस्तार है लेकिन यहां मैं हिन्दू के मन के भटकाव की बात तक सीमित रहूंगा। बाकी आगे चर्चा करूंगा। यह चर्चा भी धर्म, दर्शन और अध्यात्म के क्षेत्र

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  • एकोअहम् द्वितीयोनास्ति – आचार्य श्री होरी

    एकोअहम् द्वितीयोनास्ति – आचार्य श्री होरी0

    अब आप चिंतन करें। जब मैं और वह एक हैं, यानी आपमें इसमें उसमें वही विद्यमान है तो उसे बाहर क्यों खोजते हैं?  मूर्तियों, देवी देवताओं, चित्रों में खोजने से अच्छा है भटकाव बंद कर अप्प दीपो भव कहें  या तत् त्वम् असि कहें या सोअहम् कहें या कहें अहम् ब्रह्मास्मि। बात समानार्थी है। बुद्ध

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  • करें स्वस्थ जगत का चिंतन-आचार्य श्री होरी

    करें स्वस्थ जगत का चिंतन-आचार्य श्री होरी0

    आदि मानव जंगल में पशु, पक्षियों के मध्य रहता था। उसके मस्तिष्क से विकास बीज प्रस्फुटित होकर वृक्ष बनना आरंभ हुआ। उसने गांव, नगर बसाए। अनेक सभ्यताएं और संस्कृतियां विकसित कीं । इसके लिए मस्तिष्क को लगातार शिक्षित किया उसने। ज्ञान, कर्म और भक्ति से एक सुरम्य संसार बनाया और हिंसा से बिगाड़ा भी। उसके

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  • विज्ञानमय धर्म ही सत्य, बाक़ी सब मिथ्या – आचार्य श्री होरी

    विज्ञानमय धर्म ही सत्य, बाक़ी सब मिथ्या – आचार्य श्री होरी0

    धर्म में वैज्ञानिक दृष्टि का क्या आशय है इस लेख में इसे समझेंगे। सबसे पहले हमें विज्ञान को समझना होगा । विज्ञान भी मनुष्य के मस्तिष्क का एक अंश है । किसी में अधिक विकसित है तो किसी में कम । धर्म दर्शन अध्यात्म भी मनुष्य के मस्तिष्क में विद्यमान हैं । यहां विज्ञान का

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